Tum Dev Vinayak Ho

श्री गणेश आराधना

(तर्ज-गुरुदेव दया…)
तुम देव विनायक हो, तुम ही गणनायक हो, 
सारे ही देवों के, तुम ही महानायक हो।।
रिद्धि-सिद्धि के स्वामी हो, शुभ लाभ के दाता हो, 
इस सारी दुनियां के, तुम भाग्य विधाता हो, 
तुम जग के मालिक हो, तुम ही जग पायक हो।।
दुःख विघ्न क्लेशों को, तुम दूर हटाते हो, 
संकट विपदाओं को, तुम पल में मिटाते हो, 
तुम ही दुःख हारक हो, तुम ही सुखदायक हो।।
गणपति कहलाते हो, तुम सूंड सुंडाला हो, 
कहे दास “रवि” देवा, तुम ढूंद दुंदाला हो, 
तुम मन के मालिक हो, तुम ही मन भायक हो।।

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