(तर्ज आजा तुझको पुकारे मेरे गीत रे)
सुनलो, सुनलो हमारी अरदास रे,
प्रभु पार्श्व रै, ओ मेरे जिनवर, प्रभु पार्श्व रे ।
तुमनें तो प्रभुजी लाखों को तारे, कितने उबारे,
भक्तों की नैया लगादी किनारे. लगादी किनारे,
हम भी तेरे चरण पुजारी, पूरो हमारी आश रे ॥ १ ॥
चंचल चित्त ये तो उड़ उड़ जाये, समझ न पाये,
कैसे प्रभुजी तेरा ध्यान लगाये, ध्यान लगाये.
ऐसी शक्ति दो भक्ति में, लोन रहे तेरे दास रे ॥ २ ॥
तू ज्ञान सिन्धु हम अज्ञानी प्यासे, अज्ञानी प्यासे,
पायेंगे मंजिल तुम्हारी दया से, तुम्हारो दया से, “वोर मंडल” को तेरा भरोसा, तेरा हो विश्वास रे ॥ ३ ॥