(लय : खड़ी नीम के नीचे)
तेरापंथ के, हीरे मोती, मैं बिखराऊं गली गली।
ले लो रे गुरुदेव का प्यारा, शोर मचाऊं गली गली।
-: अन्तरा :-
१. दौलत के दीवाने सुनलो, एक दिन ऐसा आयेगा
, धन दौलत और महल मालीया पड़ा यही रह जायेगा, सुन्दर काया मिट्टी होगी, चर्चा होगी गली-गली ॥
ले लो रे …….।
२.
जिन जिन ने ये मोती लूटे वे सब माला माल हुये,
दौलत के जो बने पुजारी आखिर वे कंगाल हुये,
सोने चांदी वालों सुनलो, बात कहूं मैं भली भली ॥
ले लो रे
जीवन में दुख है तब तक ही, जब तक आत्म ज्ञान नहीं, जिनवर को जो भूल गया तो वह सच्चा इन्सान नहीं.जग का मेला दो दिन का है. अंत में होगी चला चली ॥
ले लो रे …….।