Vinayak Geet- 2 ,3

गजानन जी का गीत -२
आज गजानन्द दादाजी र नूत्यो,
 आज गजानन्द बाबाजी र नृत्यो तो दादीजी नूत जीमायो गजानन्द, 
सोन र छाज नौबत बाज, तो बड़ीयाजी नूत जीमायो गजानन्द 
सोन र छाज नौबत बाज । नौबत बाज नगारा जी बाज तो बाजरया जंगी ढोल गजानन्द 
सोन र छाज (इसी तरह पापा, काका, बिरा, मामा, फूंफा, जीजा का नाम लेणा)
गजानन गीत -३
कुंकुं भरीयो चौपड़ो, मोत्यां भरीयो थाल बनड़ रा दादाजी गजानन्द न ध्यावो म्हारा राज 
गजानन्द न ध्यायलो, रिद्ध, सिद्ध लेवो रे मनाय – २
बनड़ रा दादीजी गेरा मंगल गावो म्हारा राज – २
सोनो लंका देश को, बनड़ी र हार घड़ाय, 
रुपो ऊजल देश को बनड़ी र पायल घड़ाय 
बनड़रा बापुजी गजानन्द न ध्यावो म्हाराज – २
 मोती समन्दा पारका बनड़ी र गजरा पुवाय
 बनड़ी बड़ परीवार की जोड़ स्यूं महल पधार
 बनड़ का काकाजी गजानन्द न ध्यावो म्हारा राज – २
गजानन्द न ध्याय ल्यो गणपत लेवो रे मनाय, 
बनड़ारी मायड़ हंस हंस मंगल गावो म्हारा राज,
 बनड़ री भूवा बेना हंस हंस आरतो उतारो म्हारा राज

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