Aayi Aaj Vidayi Ye Aankhe Bhar Bhar Aayi

(लय-बच्चे मन के सच्चे)
आई आज विदाई ये आँखें भर-2 आई 
सबके हृदय गगन पर मानो विरह घटा मंडराई
हम निद्रा में सोये थे सपनो में ही खोये थे
 तुमने सबको ललकारा तोड़ी जड़ता की कारा 
हम सब पर तेरा उपकार माननगे तेरा आधार । 
बिन माली  मुरझी बगिया आज ये सरसायी
दोड़-दोड कर आते थे, सुख से समय बिताते थे 
सुनते थी तेरा व्याख्यान लगता सबको सुधा समान 
मन ये ये कही ना जाता था, रोम रोम विकसाता था। 
कहा सुनेगे अब वो वाणी दिल में चिंता छाई
सुखे सुखे विचरो हे सतिवर जग में धर्म प्रचार करो
हमको भूल नहीं जाना दर्शन देने फिर आना 
अविनय सबका माफ करों, पग-पग पर तुम विजय करो
श्रद्धा सुमनों की चरणों में हमने भेंट चढ़ाई

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