जागो नींद त्यागो, सीख सुनलो संतोंकी
इन संतो में झलक अरहंतो की
ये त्यागी है वैरागी है, बस प्रभु पद के अनुरागी है रहती भीड़ हरदम श्रीमंतोकी
नियमित दिनचर्या कसी -२जीवन में शील सुंगध बसी मानो महक अनंत बसंतों की
नही मठ मंदिर आवास कहीं, सेवा पूजा की, प्यास नहीं क्या तुलना संत मंहतो की
ये रहते हैअनुशासन में, अद्भुत जागृति है क्षण -३ मे
करे साधना निखार प्राण तत्वो की
इनका तो संयम ही धन है संसार समूचा परिजन जरा वारि जाए उन भगवंतों की