स्वागत गीत
भाइयो बहिनो गाओ गला खोलकर ।
करे स्वागत संतो की जय बोलकर ॥
कड़ी मेहनत ले गरमी में चलते रहे
चलके पांवों के छिलके निकलते रहे।
कहीं आटा पिया पानी घोलकर.
ब्रह्मचारी तपस्वी ये होते है संत
इनके स्वागत से जीवन में आऐ बसंत
मत गला खोलना नाप और तोलकर
ये दरबार है आत्म साध्य के लिये
नित नये संत आते आनन्द के लिये
आचार्य श्री का स्वागत हो जय बोलकर