दुनिया में -2देव अनेको है, अरिहंत देव का क्या कहना
उनकेअतिशय का क्याकहना,उनकेआश्रय का क्याकहना दुनिया में देव अनेको है अरिहंत देव का क्या कहना
जो दर्शन ज्ञान अनंता है ,जो राग दैष जंयवता है-२
जहाँ समकित -2दीप जले नित है
उनकी क्षमता का क्या कहना
जो आदि,धर्म की करते हैं, भव्यों के भव को हरते है
जो तिरते-2 है और तिराते हैं ऐसे तीर्थ का क्या कहना
सुर असुरों से जो पूजित है, ऋषि मुनियों से जो वंदितहै
जोतीन लोक के स्वामी है उनकी महिमा का क्या कहना
कोई पूर्व देव सरागी को ,कोई शीश नवाते भोगीको
अरिहंत देव ही देव मेरे देवाधिदेव का क्या कहना
गौतम से कहते हैं भगवन् ,दृढ श्रद्धा मय हो यह जीवन
जो शरण में है-2 जो शरण में है अरिहन्तो की उनके उनके मंगल का क्या कहना
–