जिसका हरि से जुड़ा सम्बन्ध है।
जिसको जीवन में मिला सत्संग है।
उसका हर घड़ी आनन्द ही आनन्द है
तुलसी मीरा कबिरा ने गाया ।
सूरदास जी ने करके दिखाया है।
जिसके हृदय में प्रभु स्वयं बंद है
संत ऋषियों की वाणी को मानो
सत्व क्या है जगतका यह जानो
उसका कट जाये चौरासी फंद है।
स्वर्ग जाने की इच्छा नहीं है।
मुक्ति पाने की इच्छा नहीं है।
स्वयं पूर्ण वो परमानन्द है।।