(तर्ज-दिल लूटने वाले जादूगर)
जय शांति दूत भारत सुपूत जय हो जय हो जय हो
जय तप पूत अनुभव प्रसूत जय हो जय हो जयहो
जब -2 भी हुई धर्मग्लानि तब-र महापूरुष यहाँ आये
अणु से महान लघु से प्रधान वे सिंधू बिंदू से बन पाये इतिहास दे रहा ये सबूत जय हो जय हो जय हो जय हो
② तुम बढे चले अपने पथ पर यह चरण स्वयं ज्योतिर्मय है सेनानी के पथ दर्शन में यह सारी सेना निर्भय है
यह जीवन धन पाकर अनुस्यूत जय हो जयहो जयहो
③ मानवता के हे उन्नायक सुविधायक सत्त पथ निरणायक तुम विघ्न विनायक सुखदायक क्षायक श्रेणी के संघायक
अधिनायक लायक अननुभूत जयहो जय हो जयहो