Bada Dukh Paya Re Tujhko Bisar Ke

(लय- छुप गया कोईरै)
बड़ा दुख पाया रे तुझको बिसार के 
रंग अनोखे देखें, इस संसार के
भूले उपदेश तेरा ये, जगवासी, 
चोला अनमोला खोये बनकर विलासी
 कर्मों की वीणा बाजे पापों के तार से ।।
भटके पथिक अब हुए हैं. दीवाने
गकर्म की गति को कोई नहीं पहिचाने  
 प्यासे है सब तेरी अमृत सी धार के
राग दैष और क्रोध के मारे 
अपनी ही बगिया को  आप उजारे 
वीर मण्डल को प्रभु तेरा आधार रे

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