श्री श्याम आराधना
(तर्ज-सिर पे टोपी लाल हाथ में…)
खाटू वाले मुझे बुला ले, एक बार खाटू धाम, आसरो थांरो है।।
कृष्ण कला अवतारी तू, भक्तों का हितकारी हूँ,
मात वचन हियधारी तँ, भीम पुत्र बलकारी हूँ,
शीष के दानी महा बलवानी, रखो दास की लाज ।।
मीरां के घर श्याम गये, दूध का प्याला तुरन्त पीये,
जहर को अमृत बना दिये, श्याम नाम ले मीरां पीये,
द्रोपदी बच गयी भरी सभा में, रखो दास की लाज।।
नरसी जी की देर सुनी, टूटी गाड़ी ठीक कही,
नानी बाई रो भात भरयो, भक्त री इच्छा पूर्ण की,
खाटू वासी घट घट वाशी, रखो दास री लाज।।