श्री श्याम आराधना
(तर्ज – फिरकी वाली…)
ओ मुरली वाले, तूं मुरली बजाना, नहीं तरसाना,
इस मुरली की तान से, तेरी मुरली तो बजे है बड़ी शान से ।।
मुरली बजायी तुमने रास मंडल में,राधे के मन भाय गयी,
संग में थी वो जितनी भी सखियाँ, दौड़ी दौड़ी आय गयी,
हे नंदलाला मदन गोपाला, कैसा जादू डाला,
तेरी मुरली, ने जान मेरी ले ली, सुनी जब ध्यान से।।
मुरली की धुन पर मीरां दिवानी,छोड़ दिया था जग सारा,
भक्ति में तेरी खो गयी इतनी, लेकर मन का इकतारा,
कृष्ण कन्हैया, रास रचैय्या, दाऊजी के भैय्या,
जहर पीकर, वो नाम तेरा लीन्हा, तो तर गयी संसार से ।।
जब जब भी होगी धर्म की हानि, मैं भारत में आऊँगा,
भक्तों की रक्षा करने खातिर, चक्र सुदर्शन लाऊँगा,
हे बनवारी हे गिरधारी, जय-जय रास बिहारी,
अब तो आजा, दरश दिखा जा, तू बात मेरी मान के ।।