(Lay-jhilmil Sitaro Ka Aangane Hoga)
महाप्रज्ञ गुरुवर का, दिव्य वरदान हैं।
परम पवित्र प्रेरक, पथ प्रेक्षाध्यान है ।।
चेतना को जाग्रत करके, भाव शुद्ध भरिए
खुशी का खजाना है ये प्रेक्षाध्यान करिए
प्रेक्षाध्यान, प्रेक्षाध्यान , प्रेक्षाध्यान करिए
श्वास प्रेक्षा अनुप्रेक्षा और लेश्या ध्यान से।
कायोत्सर्ग अंतर यात्रा, उपसंपदा के ज्ञान से ।।
स्वयंसे स्वयं को देखें, और भीतर मुड़िए
खुशी का खजाना है ये प्रेक्षाध्यान करिये
चैतन्यकेन्द्र प्रेक्षा आसन प्राणायाम है
सूक्ष्म क्रियाएं आदि सरल सहज आयाम है
सत्यं शिवम् सुन्दरम् के संवाहक बनिए ।।
खुशी का खजाना है ये प्रेक्षाध्यान करिये
शांति का स्रोत मंगल भावो आश्वास है
अंतर आत्मा को उज्जवल करनेका प्रयास है।
विश्व दीप बनकर के मन अंधेरा हरियै ।।
खुशी का खजाना है ये प्रेक्षाध्यान करिये