Mankha Ri Deh Bani Re Karigar

गुसाई बाबाकी आरती
 
मानखा री देह बणी रे कारीगर कोन पुरुष म्हा वोल रहया
नवसर नाड़ बोहत्तर कोटा, कांई -2मांय-2 सब भरिया अपने कंवर आगे चंवर ढुलावो करोरे  अलख हर री आर तिया 
आरतिया  महाराज गुसाई री आरतिया महाराज कंवर री आरतिया अलख गुसाई री अलख पुरुष री आरतिया   सतजुग  में प्रहलाद सिधारया पांच रे करोड़ लेकर बे तिरिया
ले होली झोलया में जबैठी, अगन जाल बसू वे उबरया अपने कंवरआग चंवर ढुलावो करोरे अलख हर रीआरतिया,    आरतिया म्हार अलख गुसाई री
त्रेता युग मे राजा बलि रे सिद्धाया सात रे करोड़ लेर बे तिरिया 
ले झारी राजा भोम सफल की बामन होय बलि ने छल गया अपने कंवर आग चंवर ढुलाओ करोरे अलख हररी
आरतिया 
म्हार अलख गुसाई री, आरतिया म्हार देव कंवर री आरतिया 
त्रेता  युग में राजा हरिचंद सीधाया नोरे करोड़‌ लेर बे तिरिया 
कन्या रे कारण राजा दान बाटीयो नीर नीच घरबा भारियो
द्वापर मे पाच पांडव रे सिद्धाया बारह रे करोड‌ लेर बेतिरिया 
 राणी रे द्रोपदी रो चीर बढायो भूनो-2आम सफल फल
गया
 अपने कंवरआग चंवर ढुलाओ 
 गोपी चंद  राजा भरतरी लेगया राजपाट सब बेचदिया आसन ढाल अडग हुई बेठया आवण जाबण सू बे उबरया पांचा रे साता नवाँ र बारवा, पुर तेतीस मिले मिलया,
 शुभजी से संत दिवाकर बोल्या बीन बासो दयो अमरापुरिया 
चौसठ जोगण खड़ीरे आगे पोख सूरज मंगल गाव सुरसतिया

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