Vandana Mil Jul Kare Mahavir Ki

(लय – दिल के अरमा)
वंदना मिलजुल करें महावीर की ।।
 विश्वधन, विश्वास की तस्बीर की ।।
① महीपति सिद्धार्थ के कुल दीप थे 
माता त्रिशला के सुदर्शन वीर की
 राज वैभव को को। पलक में पीठ दें 
जो बन भगवान उस गुण धीरकी ।।
जो रहे निष्कंप मंज़िल राहमें 
उस अभय अरू प्रेम के प्राचीरकी।
बाँधना जिसको न संभव छंद में । 
उस अलोकिक चेतना मय पीर को ॥

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