(लय- होटों से छूलो तुम)
दे कैसे आज विदा मन भर-भर आता है
दुर्लभ सानिध्य मिला, जाना न सुहाता है।
आये थे जिस दिन तुम कितनी खुशहाली थी
खुशियों की धन वर्षा फैली नव लाली थी।
पर आज उदासी है यह दिल अकुलात्ता है
उत्तरे-2 चेहरे मन खोया – 2 है।
जिस और भी देखें हम मन रोया रोया है
आवाज रुकी सबकी, प्रस्थान न भाता है
जाते हो चले जाओ हमको मतविसराना
(देखगे राह सदा मन चाह सुनाते है। )
“सुधलेने हम सबकी प्रस्थान न भाता है
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