मोती
नेमीश्वर गीगनारा रा वासी तो, मोती दयो महाराणी जी।
कोरी कोरी कुल्हड़ी में दही रे जमादयूं तो,
गोडे बैठ जीमादयूजी’ ।
कांई रे करूं थारै कुल्हड़ी रो दही तो, गोडे परतन वैठाजी ।
बागो तो केसरीया सियां दयूं तो, टोपी लाल गुलाबीजी।
काई रे करूं थांरो केसरीया बागो तो, टोपी परतन ओढाजी ।
हाथ पगां में कड़ी रे कडूला तो, गलै में मादलियोजी ।
कांई रे करूं रे थांरों कड़ी रे कडूलो तो, मादलियो परतन पहरांजी ।
सोने रो तनै चिटीयो घडाद्यूं तो, दड़ीया रतन जडादयूंजी ।
कांई रे करूं थांरो सोने से चिटीयो तो, दडीया परतन खेलांजी ।
दड़ी हाथ न खेलांजी ।
माता सेवादेजी न रीस ज आई तो दोय दोय थपडां मारीजी” ।
हाथां मारी लाता मारी तो, चुंठीयो चमकायोजी ।
गीगो रुस बजारां चाल्यो तो, सामै दादोसा मिलग्याजी ।
हाथज पकड गीगै ने ल्याया तो, गीगै ने कुण रुसायोजी ।
थांरो गीगो बहुत हठीलो तो, सोय सोय जीनसा मांगैजी’ ।
हार तोड़र मोती मांगैजी ।
म्हारो गीगो बहुत हठीलो तो, सोय सोय जीनसा देस्यांजी ।
डब्बो खोल बराबर बैठ्या तो, हार तोडर मोती दीनाजी’ ।
मोती ले पीछोकर बाया तो, सांझ पडै उग आया जी ।
पो फाटी दिन उगण लाग्यो तो, लामक-झुमक लाग्या जी
गाडो भर मोत्यांरो ल्याया तो, भरीया घीरत भंडारांजी ।
माता सेवादेजी बांटण लाग्या तो, मन में हरस न मावैजी ।
उपराडे पाडोसण बोली तो, म्हारोड़ी पांती करद्यो जी ।
बारै स्यूं भुवा बाई आया तो, म्हारो भी झोलो भरज्यो जी
म्हे थांने पूछां कंवर कानुडा तो, आ बुध कवण बताई जी
नेमीश्वर गीगनारा रा बासी तो. आ बुध बाई बताई जी ।
जे ईया जाणती मोती इसी तो, हार समुचो देती जी ।
वा हो माता लोभ न कीजै तो. बेल्यांरा बाया मोती नीपजै जी ।
बेल्यांरा बाया मोती नीपजै तो, आ बेल्यां भल हुइज्यो जी ।