सोने रो सूरज उगियों
सोने से सूरज उगियों, म्हारो खिल रह्यो भाग सोभाग रे, बधावो गावो, तपस्या हुई है म्हारे आँगणे । ॥ ध्रुव ।। झुमरमल सा रा लाडला, माता नेमा जी रा अंगजात रे, बधावो गावो, तपस्या हुई है म्हारे आँगणे ।।
कविकुल कमल दिवा करो, ए तो जिण न शासन रा नाथ रे, बधावो गावो, तपस्या हुई है म्हारे आँगणे ।।
मुखमंडल महिमा मिल्यो, जाणे उग्यो पूनम-चाँद रे, बधावो गावो, तपस्या हुई है म्हारे आँगणे ।।
शरण लिया सुख सासता, कटे स्मरण कियां भव फंद रे, बधावो गावो, तपस्या हुई है म्हारे आँगणे ।।
शोभ निराली नगर री, लाग्यो गलियां, गलियां रंग रे, बधावो गावो, तपस्या हुई है म्हारे आँगणे ।।
असवारी गुरुदेव री, आई घूमत ज्यू मातंग रे बधावो गावो, तपस्या हुई है म्हारे आँगणे ।।
निरख छटा गणीराज री, हुवै हर्षित जैन अजैन रे बधावो गावो, तपस्या हुई है म्हारे आँगणे ।।
मधुरी मधुरी भारती, सुण चित्त में पामें चैन रे, बधावो गावो, तपस्या हुई है म्हारे आँगणे ।।
चीरंजीवो महाश्रमणजी, ए जो जनता रा सुख चैन रे, बधावो गावो, तपस्या हुई है म्हारे आंगणे ।।