Swamiji Aao Dekh Lyo

( लयः सारंगा तेरी याद में)

रचयिता : मुनि मधुकरजी

स्वामीजी ! आवो देखल्यो
स्वामीजी! आवो देखल्यो, नैणां में तसवीर । 
तरस रह्या म्है दरस बिना, मछल्यां ज्यूं बिन नीर ।।
१. पल-पल जोवै बावरी, पलकां थांरी बाट, 
मिलणो चावै मोद स्यूं, बंधन सारा काट । 
दिखलाद्यो प्रभु वेग स्यूं, अपणो रूप विराट ।।
२. कलजुग में भी थे लिख्या, सतजुग का सा लेख, काजल सी काळी घटा में, है बिजली री रेख ।
 सुंदर सुवरण थाळ स्यूं, काढ़ी पीतळ मेख ।।
३. मधरी-मधरी चाल स्यूं, पहुंच्या शिखरां पार, 
पगले पगले पर मिल्या, धगधगता अंगार । 
तूफानां में भी बढ़या ले हाथां पतवार ।।
४. सरदी गरमी तावड़ो, गिणता कद बरसात, 
समझावण नै गाळता, आखी आखी रात । 
कष्ट सह्या पिण राखली, जिनवाणी री बात ।।
५. आज उतारां आरती ओ ! हिवड़ै रा हार, तन-मन स्यूं अरपण करां, श्रद्धा रो उपहार । मानो-मानो देवते ! ‘मधुकर’ री मनुहार ।।

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