The To Dharm Dipawan Har

(लय- भाई म्हारा रंग सू तो रंग मिले जाय)

* थे तो धर्म दीपावन हार तपस्या रा लीज्यो वारणा

 थे तो ज्योति जगावन हार “तपस्या रा लीज्यो वारणा

देख ठाठ तपस्या रो सुन्दर हिया हिलोरा खाय’
आठ पाँच कोई तेला पचके बेला री गिनती न आय।
पाँच इन्द्रिया वश में होवे छठो मन अधिकार ।
हाडा उपर खूंटया ठोके कर्मा र काटण हार ।।
एक कवा रो कम खाणो भी दुर्लभ है जगमाय’
खान पान तज से गम खाये अन्तर शक्ति जगाय ।।
बाता सोरी, केनो सोरो सोरो जग व्यवहार। 
एक तपस्या करणी दोरी देवेन्द्र देव जाने हार।। 11
धन्य धन्य ये तपस्या साधे, धन्य करे अवतार।
 कुमुद मुनि कहे चढ़ते भावे एक दिन करें भव पार ।।
* तप है कुमकुम तप है केसर तप जीवन का चंदन तपकी महिमाहे अपार । 
तप अभिनंदन के अवसर पर अनुमोदना बारम्बार ।।

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