Babe Ro Nam Bado Hai Pyaro

बाबै रो नाम बड़ो.  

(लयः बन्ना ओ बागां में झूला)

रचयिता : मुनि विजय 

भिक्षु स्तुति 
बाबै रो, नाम बड़ो है प्यारो ओ । 
म्हारी आंख्यां रो, तारो जीवन रो है उजियारो ।।
१. सिंह री, ज्यूं गूंज्यो जीवन रण में ओ,
 कायरता, कभी न ल्यायी मन में ओ ।
नहीं पायो है, पार प्रभु री शूरवीरता रो ।।
२. सुधरी री, छतस्यां में प्रभु वास करयो
अन्धेरी, ओरी में चौमास करयो ।
 मिल्यो सगळा नै, परचो बाबै री महिमा रो ।।
३. मेरू ज्यूं, निज प्रण पर बो अटल रह्यो,
 भावुक बण, जन प्रवाह में नहीं बह्यो । 
छोड़ फूलां नै, स्वीकार करयो पथ कांटां रो ।।
४. श्रद्धा स्यूं, जो भी प्रभु नै सिंवरै ओ,
 उण नर रो, मिनख जमारो सुधरै ओ । 
लाखां लोगां रै, जीवन रो है बाबो रखवारो ।।
५. दर्शण नै, मनड़ौ घणो उम्हावै ओ,
रसना आ, प्रभु री रटन लगावै ओ । 
ध्याऊं हर घड़ी, ‘विजय’ सांवरिये रो उणियारो ।। 

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top