भिक्षु की अभिवन्दना
(लय- दिल के अरमां)
साध्वी -जयश्री जी
भिक्षु की अभिवन्दना हम कर रहे
स्मरण से मन में खुशाली भर रहे।।
१. आ गये वे विश्व की तकदीर बन ।
नाम से भव-सिन्धु सारे तर रहे ।।
२. जिन्दगी भर बन शमां जलते रहे
रोशनी से हर अंधेरा हर रहे ।।
३. संघ-हित कानून जो तुमने दिए ।
आज हम अभिमान उन पर कर रहे ।।
४. संघ का हर गुल महक देता नई ।
विश्व को सुरभित उसी से कर रहे ॥
५. तुलसी की शुभ शासना से धन्य हैं ।
भक्ति से ये प्राण गण पर धर रहे ॥