Bhikshu Bhikshu Hi &. Swami Ji Tharo Sangh Nirlo

भिक्षु भिक्षु ही जबां पर (लयः दिल के अरमां ……..)
रचयिता : साध्वी चाँद कुमारी जी
भिक्षु भिक्षु ही जबां पर नाम है।
 तेरे नाम से मिलता बड़ा आराम है ।।
१. हृदय की धड़कन तुझे पुकारती,
 दर्श पाने को ये पलकें निहारती । 
जिन्दगी का तूं सही विश्राम है ।।
२. हर सांस में प्रभु नाम की झंकार है, 
तेरे चरणों से हमें तो प्यार है।
 सोते उठते एक तेरा ध्यान है ।।
३. तूं ही जीवन का अमर विश्वास है,
 हो रहा प्रतिपल तेरा आभास है ।
 तेरी स्मृतियां शान्ति का शिव-धाम है ।।
४. विघ्न मिटते द्वन्द्व कटते नाम से, 
मंगल ही मंगल तेरे अभिधान से । 
होते सुमिरण से सफल सब काम है ।।
भिक्षु स्तुति 
लयः सावण आयो रे ….
रचयिता : साध्वी चाँदकुमारीजी
स्वामीजी थांरो संघ निरालो
संघ निरालो रे, गावां यशोमय गान,
स्वामीजी थांरो, संघ निरालो रे बोल रह्यो बलिदान, स्वामीजी थांरी संघ निरालो रे ।
 १. मां दीपां सिंह सपनो देख्यो, सचमुच बो साकार हुयो, कंटालियै बल्लू शाह घर में, बालक रो अवतार हुयो । भीखण अभिधान दियो है, शुभ मुहुरत पहचान ।।
२. धन्य हुई अंधेरी ओरी, थांरो चरण स्पर्श पाकर, 
जागी किस्मत यक्ष देव री, नमग्यो चरणां में आकर । करतो तन मन स्यूं सेवा, छवि बणी अम्लान ।।
३. शास्त्र सिन्धु री गहराई में, उतस्या गहरा डटकर, 
एक अमिट आलेख लिख्यो, हर शब्द समीक्षा रै बल पर । दिल रो संकल्प फल्यो हो, सत्पथ पर प्रस्थान ।।
४. संयम स्यूं अनुप्राणित संगठन, गण रो परित्राण है, मर्यादा अनुशासन संघ, व्यवस्था जीवन प्राण है ।
 लिख्यो जो निज हाथां स्यूं, अमर बण्यो सुविधान ।।
५. महामनस्वी महाप्रज्ञ जी, करै संघ री रखवाली, महाश्रमण सा युवाचार्य पा, बण्यो संघ गौरवशाली । अणुव्रत प्रेक्षा उपक्रम स्यूं, पायो ऊंचो स्थान ।।

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