Munind Mora

मुणिन्द मोरा

श्रीमज्जयाचार्य 
मुणिन्द मोरा, भिक्षु ने भारीमाल, वीर गोयम-सी जोड़ी रे, स्वामी मोरा । अति भली रे, मोरा स्वाम ।।
मुणिन्द मोरा, चोथा आरा नी चाल, विविध मर्यादा बांधी रे, स्वामी मोरा । निरमली रे, मोरा स्वाम 11१11
मुणिन्द मोरा, आप मांहि तथा गण में जाण, सुध संजम जाणो तो रे, स्वामी मोरा । रहिवो सही रे, मोरा स्वाम ।।
मुणिदं मोरा, बगा हूं रहिवा रा पचखाण, बलि अजब्त सिद्धां री साखे रे, स्वामी मोय । सम सही रे, मोरा स्वाम ।।२।।
मुणिन्द मोरा, अवगुण बोलण रा त्याग, गण में अथवा बाहिर रे, स्वामी मोरा । विहुं तणै रे, मोरा स्वाम ।।
मुणिन्द मोरा, मुनिवर जे महाभाग, ए मर्याद आराधै रे, स्वामी मोरा । हित धणै रे, मोरा स्वाम ।।३।।
मुणिदं मोरा, तीजे पट ऋषिराय, खेतसीजी सुखकारी रे, स्वामी मोरा । मुनि-पिता रे, मोरा स्वाम ।।
मुणिन्द मोरा, सम दम उदधि सुहाय, हेम हजारी भारी रे, स्वामी मोरा । गुण रता रे, मोरा स्वाम ।।४।।
मुणिन्द भोरा, जवजश करण जिहाज, दीप जणी दीपक-सा रे, स्वाभी मोरा । महामुनी रे, मोरा स्याम ।।
मुणिन्द मोरा, गणपति में सिरताज, विदेह क्षेत्र प्रगटिया रे, स्वामी मोरा । महाधुनी रे, मोरा स्वाम ।।५।।
मुणिन्द गोरा, अमियचन्द अणगार,
 महातपसी वैरागी रे, स्वामी मोरा । गुणनिलो रे, मोरा स्वाम ।।
मुनिन्द मोरा, जीत सहोदर सार, 
भीम जबर जयकारी रे, स्वामी मोरा । 
अति भलो रे, मोरा स्वाम ।।६।।
मुणिन्द मोरा, कोदर तपसी करुर, 
रामसुख ऋषि रुड़ो रे, स्वामी मोरा । राजतो रे, मोरा स्वाम ।।
मुणिन्द मोरा, शिव-दायक शिव-सूर, 
सतीदास सुखकारी रे, स्वामी मोरा । गाजतो रे, मोरा स्वाम ।।७।।
मुणिन्द मोरा, उभय पिथल वर्धमान,
 साम राम युग बन्धव रे, स्वामी मोरा । 
नेम सूं रे, मोरा स्वाम ।।
मुणिन्द मोरा, हीर बखत-गुण-खान, 
थिरपाल फतैचन्द जपियै रे,
 स्वामी मोरा । प्रेम सूं रे, मोरा स्वाम ।।८।।
मुणिन्द मोरा, टोकर ने हरनाथ, 
अखैराम सुखरामज रे, स्वामी मोरा । 
ईश्वरु रे, मेरा स्वाम ।।
– मुणिन्द मोरा, राम सम्भू शिव साथ,
 जवान मोती जावा रे, स्वामी मोरा । 
दमीश्वरु रे मोरा स्वाम ।1९11

मुणिन्द मोरा, इत्यादिक बहु सन्त, 
बलि समणी सुखकारी रे. स्वामी मोरा । दीपती रे, मोरा स्वाम ।।
मुणिन्द मोरा, कल्लू महा गुणवन्त, 
तीन बन्धव भी माता रे, स्वामी मोरा । 
जीपती रे, मोरा स्वाम ।।१०।।
मुणि न्द मोरा, गंगा नै सिणगार,
 जेतां दोलां जाणी रे, स्वामी मोरा ।
 महासती रे, मोरा स्वाम ।।
मुणिन्द मोरा, जोतां महा जश धार, 
चम्पा आदि सयाणी रे, स्वामी मोरा । 
शोभती रे, मोरा स्वाम ।।११।।
मुणिन्द मोरा, शासण महा सुखकार
 अमर सुरी अधिष्ठायक रे, स्वामी मोरा । 
दायका रे, मोरा स्वाम ।।
मुणिन्द मोरा, दवदन्ती जयवन्ती सार, अनुकूल बलि इन्द्राणी रे, स्वामी मोरा । सहायका रे, मोरा स्वाम ।।१२।।
मुणिन्द मोरा, उगणीसै चवदै उदार, कार्तिक सुदि तिथि दशमी रे, स्वामी मोरा । गाइयो रे, मोरा स्वाम ।।
मुणिन्द मोरा, … जय-जश! सम्पति सार,
 बीदासर सुखसाता रे, स्वामी मोरा । 
पाइयो रे, मोरा स्वाम ।।१३।।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top