भिक्षु स्तुति (रचयिता : मुनि सुमतिकुमारजी)
(लय- बादलियो आंखडल्या में)
सुबह-सुबह उठकर भिक्षु-भिक्षु बोल तूं, संकट सब कट जावैला, ओ सुजना ।। विघ्न हरण ओ मंगलकारी नाम है, दुःख में आडो आवैला, ओ सुजना ।।
१. सांवरिये रो सुन्दर नाम, प्राणां स्यूं भी प्यारो है, बल्लूशा रो पुत्र, माता दीपां रो दुलारो है ।
भक्तां रै मन भावैला, ओ सुजना ।।
२. स्वामीजी रै नाम स्यूं, सरै इच्छित काम है,
सिरियारी बण्यो आज, पावन तीरथ धाम है ।
दुःख दुविधा मिट जावैला, ओ सुजना ।।
३. ॐ भिक्षु जय भिक्षु, मंत्र चमत्कारी है,
प्रतिपल जाप जपो, भय भंजन हारी है ।
पौरुष मन में जागैला, ओ सुजना ।।
४. स्वामीजी रो नाम लाखां, लोगां रो आधार है,
अन्तर मन स्यूं ध्यान धस्यां, होसी बेड़ो पार है ।
कल्मष सब धुप जावैला, ओ सुजना ।।
4. घोर कलिकाल में, भिक्षु शासन पायो है,
मानो चिन्तामणि रत्न, कर में म्हारे आयो है ।
कल्पवृक्ष लहरावैला, ओ सुजना ।।
६. संघ नायक घोषित, भिक्षु चेतना रो वर्ष है,
तेरापंथ संघ रो ओ, भावी उत्कर्ष है ।
चार तीरथ हरषावैला, ओ सुजना ।।
७. ‘मुनि सुमति’ री आस्था, थां पर अपरम्पार है,
खाता-पीता, सोता उठता, भिक्षु री गुंजार है ।
मन निर्मल बन जावैला, ओ सुजना ।।