भिक्षु स्तुति (रचयिता: आचार्यश्री तुलसी)
सिरियारी से संत (लय: म्हानै गंगाजी रो पाणी)
तेरापंथ रो भाग्य विधाता, श्रमण संघ रो सक्षम त्राता,
लाखां आंखड्ल्यां रो तारो, हार हिया रो लागे । महानै सिरियारी रो संत प्यारो प्यारो लागे ।।
१. सत्य सिराणै सदा राखतो, त्यागी सारी सुविधावां, जिनवाणी पर जीवन-जामा, झोंक्या बलिहारी जावां । बणों साधना सिद्धि स्वयं ही, चीर चल्यो सब बाधावां, आत्म-समर है अमर वीर री, म्है गौरव गाथा गावां ।
पांवा सुमिरण स्यूं सुखसाता, बण ज्यावां हां ताजा-माता,
दाता ज्ञान-चक्षु रो, सूरज सो उणिहारो लागे ।
महाँनै सिरियारी से संत प्यारो प्यारो लागे ।।
२. त्याग तपोबल प्रबल मनोबल, चकित-चकित मानव रहग्या,
खड्या हुआअवरोध जिता ही, अपणै आप सभी ढहग्या । प्रतिस्रोत में बढ्यो भले ही, अनुस्रोत में सब बहग्या, पुन्य-पोरसो तेज भोर-सो, घोर विरोधी भी कहग्या ।
मन संकल्प शक्ति ही भारी, धार्मिक जन जुग जुग आभारी,
मावस रात में बो पूनम सो उजारो लागे ।
म्हांनै सिरियारी से संत प्यारो प्यारो लागै ।।
३. पंथ चलाणो लक्ष्य नहीं हो, चल्या चरण बस पंथ बण्यो, कुण जाणै किण पुळ में दीपां मां अलबेलो पुत्र जण्यो । बचपन स्यूं बुढ़ापे तांई, रह्यो सुरंगो बण्यो ठण्यो, ढिगला-ढिगला रतन निकाल्या, नहीं निरर्थक प्हाड़ खण्यो ।शासन में अनुशासन थाप्यो,
मानदण्ड स्यूं जाय न माप्यो,
व्याप्यो जन-जन रै मन-मन में मोहनगारो लागै ।
म्हांनै सिरियारी रो संत प्यारो प्यारो लागे ।।
४. बिन वैराग भेष साधू रो, भार गधे पर हाथी रो,
काच मिणकलो कठै, कठै बो अणमोलो संयम-हीरो । बड़े घराणै रो चाहे वैधव्य सरावै कुण की रो, समझदार समझै है खोटे सिक्के री कीमत जीरो ।
आ है सांवरियै री वाणी,
अनुभव रै छकणै स्यूं छांणी,
कानां घणी सुहाणी झालर-सो झणकारो लागे । लागे ।।
म्हांनै सिरियारी रो संत प्यारो प्यारो
५. संविधान जद गढ्यो बढ्यो जस, हुई बगावत भी सागै, घबराहट रो काम नहीं, चढ़ चल्यो स्वयं नाजुक धागे । चंदो वीरो चंदू वीरां फत्तू च्यारां रै ठागै,
भेळो आ’र नहीं थारै म्हारै जो पैर धरयो आगै ।
रुकग्या चरण सतजुगी जी रा,
सुणतां रेग्या संत सधीरा,
आंखे म्हांनै झांखे बाबलियै रो काम करारो सिरियारी रो संत प्यारो प्यारो लागे । लागे ।।
६. तूं कद दीक्षा लेसी, जब तक जिवै मेरण्यां मगरै री, दुलहिन रोवै न्याय, दुल्हो रोवै कुण-सी दुविधा हेरी । सुण्यां बात संजम री ताव चढ़े, तब दीक्षा में देरी,
एक मस्यां दोन्यां नै लेणी पड़सी अणसण री सेरी ।
इण विध कर कर कड़ी कसौटी, चुपकै खींची सबरी चोटी,
ज्यूं-त्यूं मूंडणो बाबै नै जे’र खारो लागै ।
म्हांनै सिरियारी रो संत प्यारो-प्यारो लागे ।।
७. आज्ञा धर्म अनाज्ञा अधरम चल्यो सफल अभियान जो, सही समझ दी धार्मिक जग नै ओ मोटो अवदान जो । जाग्रत जीवन जीयो, राखी सम्मुख साध्य महान जो, प्राप्त अतीन्द्रिय ज्ञान अपूरब साहस रो संधान जो ।
इच्छा मृत्यु वरी ज्योतिर्धर, पद्मासन में समता-निर्झर, स्वामी भवसागर रो जाणक लियो किनारो लागै । म्हांनै सिरियारी रो संत प्यारो-प्यारो लागै ।।