Swami Bhikhanji Ro Nam Aathu Yam Dhyawa

(लयः म्हरि आंगणिये में……) आचार्य श्री तुलसी 

स्वामी भीखणजी रो नाम
स्वामी भीखणजी से नाम आठू याम ध्यावा, बाबलियै रो उपकार किंयां भूल ज्या वा। 
सांवरियो म्हांरै रूं  रू रम्यो है, पल-पल छिन-छिन स्मृति  सरसावां ।।
मंत्राक्षर है नाम स्वाम रो, सरल मंत्र है परमधाम रो. भिक्खू नाम री गंगोतरी में नित न्हावां ।।
२. बलिदानां री अमर कहाणी, 
तीव्र तपोबल री सहनाणी, कामकुंभ, कल्पवृक्ष, चिंतारत्न पावां ।।
३. दो सौ बरसां री बै बातां, बैठ जगाई बाबो रातां, यादकर मर्याद मन हुलसावां ।। 
४. खड़ा-खड़ा पड़िकमणो करता, 
बुढ़ापे रो ध्यान न धरता, उतपातिया प्रतिभा री भारी घटनाां ।।
गच्छा बाड़ां री दुरवस्था, मेटी सारी विषम व्यवस्था, तेरापंथ री सजीव नींव थिर ठावां ।।
६. समझायो जीवन रो दर्शण, नहिं भायो, उपरि आकर्षण, बाही श्रृंखला सजोश आपां अपणाां ।।
७. धर्म क्रांति रो बिगुल बजायो, 
रूढ़िवाद रो भूत भगायो, देखो आज ओ अनुठो दृश्य देख पाां ।।
८. है ज्योतिर्मय जीवन जीणो, जी भर शान्त सुधारस पीणो, झीणो स्वामीजी रो तत्त्व-बोध सीख पाां ।।
९. सुद भाद्रव सरदारशहर में, धर्म-बहार लगी घर-घर में, ‘तुलसी’ प्रेक्षा-ध्यान साधना रो रंग ल्यावां ।।

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