लय – माइनी माई मुंडेर पे तेरी
छोड़ हमें जाये समणी जी-2, कैसा कैसा लगता।
नाम विदाई का सुन सुन कर मन भर भर के आता ।। जाते क्यों बोलो? जाते क्यों बोलो?
① पुण्यायी है प्रबल हमारी भैक्षव शासन पाया।
तेरापंथ सा नंदनवन और कल्पतरू सी छाया।
गण का सुयश बढ़ाये सब मिल-2, अनुशासन मन भाता ॥
② पर्युषण में रंग लगाया. भूल नहीं पायेंगे ।
दौड़े-2 सब मिल आते अब हम कहां जायेगे ।
सोचो समणीजी बोलो कुछ तो-२, जाना नहीं सुहाता ।।
③ कितनी-2 हुई तपस्या इस वर्ष पर्युषण में।
धर्म ध्यान के फूल खिले सिंगापुर के उपवन में।
समणी जी के श्रम को क्या-२, शब्दों में गाया जाता ।।
④ सिंगापुर के वासी सारे मिलजुल करके गाते ।
यात्रा मंगल मय हो सम्णी मंगल भाव सुनाते ।
वापिस जल्दी यहां पधारो-२ रहे सदा सुख साता ॥
⑤ नादानी वश हमसे कोई भूल हुई समणीजी,
क्षमाशील हो, सरल हृदय हो माफ करे समणीजी
अर्जी है इतनी समणी जी-२ भूल हमें ना जाना