म्हारा हिवडा में हर्ष हिलोर
(तर्ज – म्हारा हिवडा में नाचे मोर…)
म्हारा हिवडा में हर्ष हिलोर, शुभ अवसर आया
हम आकर भाव विभोर, तपस्वी गुण गावा
पुलकित तन मन, खुशी का सरगम,
खिल गई जीवन बगियाँ
ये तप तो कितना पावन है, जैसे महके घी – चंदन है
एसी खुशबुसे, ऐसी भक्तिसे, महका तपस्वी का जीवन है गुरु मेहर का, मेघ जो बरसे, खिलन- जाये आतम बगियाँ म्हारा हिवडा में…
ये तप का सावन आया है, संग त्याग का मौसम लाया है ऐसी गुरुदेव की वाणी ने, तप इनका सफल बनाया है
श्रध्दा से जन जन करता, अभिनंदन सब आज तुम्हारा म्हारा हिवडा में …