(तर्ज-माईनी माई)
आज हमारे मन आंगन में देखो खुशीयाँ छाई
सौ सौ साधुवाद उन्ही को तप में शक्ति जगाई
भिक्षु शासन की बगिया में तप का फूल खिला है
बड़े भाग्य से ऐसा नन्दन वन् गण हमे मिला है
इस आंगन की-2 -ठंडी लहरें चले पवन पुरवाई।
सो सो साधुवाद —
तप के पथ पर चलनेवाले सचमुच किस्मत वाले
तप हिम्मत से बढने वाले अवसर का लाभ उठाले
संयंम तप की-2 ,सौरभ से महके कलिया अलसाई।
सौ-2
मंगल गाएं मोद मनाए इस श्वर्णिम अवसर पर
सोयी शक्ति जगाकर तप के दीप जलाए घर घर
श्री भिक्षु महाश्रमण-२, करुणा से तप की अलख जगाई