Tapsya Hai Uttam Mangal

(लय- शिविर है जीने का विज्ञान) 

(धर्म की लौ जलाए हम)

तपस्या है उत्तम मंगल, तपस्या है उत्तम मंगल।
 बने चेतना दिन-२ तप्‌ की  ऊर्जा   से उज्जवल 
* जैसे बहते पानी  के झरनो से भरे रे जलाशय
 वैसे आश्रव के नालों से कर्म दलों का संचय
 संवर और निर्जरा द्वारा हो निर्रझर निर्मल।
* एहिक और पारलौकिक आकांक्षाओं को त्यागे 
मान प्रतिष्ठा और बड़प्पन की न भावना जागे
 धर्म क्रिया में मात्र निर्जरा दृष्टि रहे पल-2
* उदर विकार जनित रोगों से छुटकारा मिलता है
 शुभ भावों के सिंचन से आनंद कमल खिलता है 
परम शांति मिलती, इन्द्रिय  मन की मिटती हलचल 

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