।। श्री श्याम वन्दना ।।
(तर्ज-आओ जी आओ म्हारे हिवड़े रा पावणा…)
आओ जी आओ बाबा, आज म्हारे आंगणै,
भगत बुलावै थानै आणो पड़सी ।।टेर ।।
थां बिन म्हारो जीवन सूनो, यूं ही बीत्यो जाय,
बीच भंवर में नैया म्हारी, आकर पार लगाय,
मैं तो डूब रहा बीच मझधार में,
नैया न पार लगायां सरसी ।।१।।
सावण के महिनां मैं बाबा, झिरमिर मेहड़ो बरसे,
थारे दरश की आँखिया प्यासी, मनड़ो म्हारा तरसै,
म्हे तो प्यासा बाबा थारै दरश का,
मनडेरी प्यास बुझायां सरसी ।। २ ।।
थारो सेवक होकर बाबा, दर-दर ठोकर खाऊँ, मैं थारो बालक तूं म्हारो बाबो फिर क्यूँ दुःख पाऊँ, म्हे रूठ गया बाबो देखो आज तो रूठयोड़ा न आज मनायां सरसी ।।३ ।।
‘भक्त मण्डल’का टाबर बाबा, थारा ही गुण गावे, दास’काशी’ चरणां रो सेवक, थानै शीश नवावे, आओ ना आओ बाबा क्यूँतरसाओ, भगतां री लाज बचायाँ सरसी ।।४।।
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