।। श्री श्याम वन्दना ।।
(तर्ज-जिया ले गई पिया तेरी…)
कान्हा खाले रे जरा छप्पन भोग सजा-२,
मानूँगा में दाता एहसान बड़ा….
हलवा, इमरती, रसगुल्ला, माखन प्रेम से खा लल्ला, * बर्फी साज बुन्दी भुजिया, रबड़ी जलेबी केसरिया,
मोतीचूर के लड्डू श्याम चखले जरा ।।१।।
पेड़ा, कलाकन्द, मालपुआ, चमचम दनादन खा छलिया, पूड़ी, कचौड़ी, गजरैला सब्जी दाल है पचमेला,
फोगले को रायता है प्याले में भरा ।।२।।
चटनी, समोसा, खीर, दही, माठी, पकौड़ी, बालुशाही, घेवर मलाई चीनी का, आजा मजा ले फीणी का,
चनाचूर है टाटा वाला, बड़ा कुर मुरा ।।३।।
केला, सफेदा, सीताफल, आडू, संतरा, पानीफल,
मेवे सजे है क्या देरी है, किशमिश, बादाम कि है गिरी है, दूध का कटोरा श्याम, पीले रे जरा ।।४।।
लीची, मुस्मबी, बेदाना, चीकू, पपीता खा जाना, पिस्ता, छुआरा, खुरमानी, काजू, अंजीर है अफगानी,
खाकर जरा कुल्ला करले, बीडा पान मुरली का ले.
* धनिया सौंफ और चूरी है,’लक्खा’ से अब क्या दूरी है, कहे ‘हर्ष’ अब सब भक्तों की आस पुरा ।।५।।