।। श्री श्याम वन्दना ।।
(तर्ज-एहसान मेरे दिल पे तुम्हारा…)
एहसान तेरा भक्त पे, काफी है साँवरे,
हर भूल की देता हमें, माफी तू साँवरे ।। टेर ।।
इतना दिया है तूने, कर्जदार है तेरे,
लेकिन चुका न पाये, गुनाहगार हे तेरे,
लेने में फिर भी शर्म, ना आती है साँवरे ।१।।
अपना बनाया तूने, मेहरबानी है तेरी,
लायक हमें भी जाना, कदरदानी है तेरी,
अब तो तुम्हारी याद, ना जाती साँवरे ।।२।।
अहसाँ उतार पाये ना, बिक जाये हम यदि,
जनमों की सेवा’हर्ष’तू देगा है ये यकी,
दिल में हमारे आस ये, बाकी है साँवरे ।।३।।