।। श्री श्याम वन्दना ।।
(तर्ज-हनुमान को खुश करना…)
अपने भगत से कितना वो प्यार करता है,
रहता है खाटू में पर ध्यान रखता है ।।
जब भी पुकारूँ मैं वो दौड़कर आये,
चाँदी का सिंहासन वो छोड़कर आये,
अपने भगत पर कितना उपकार करता है ।। रहता है…
करता है रखवाली दिन रात भक्तों की,
सुनता हमेशा वो हर बात भक्तों की,
मझधार में हो नैया, वो पार करता है ।। रहता है…
हम मांगते रहते वो भेजता रहता,
भक्तों की हालत को वो देखता रहता,
भक्तों की झोली खाली हर बार भरता है ।। रहता है…
कर्जा तुम्हारा श्याम कैसे उतारेंगे,
‘बनवारी’ सेवा में जीवन गुजारेंगे,
पूजा तेरी करने से जीवन सवंरता है।। रहता…