(धुन : दिल के अरमां…)
अर्हता के शिखर श्री महावीर हैं, शिखर को देखे, बने वह वीर है ॥
धन्य त्रिशला पारगत मातेश्वरी । खुले नृप सिद्धार्थ के तकदीर है ॥
चरम तीर्थंकर परम-पावन प्रभु । शान्ति समता के समंदर क्षीर है ॥
जगत के सब प्राणियों के मित्र हैं। त्याग तप करुणामयी तसवीर हैं ॥
विश्व वत्सल ! विश्व वंदित ज्ञानमय । मलय कानन की सुगंध समीर है ॥
जो शरण में आ गया वह तर गया । “कनक” का बस साधना से सीर है ॥
धुन : दिल के अरमां…