Chaturmas Ke Bad Vidayi (Tarachandji Swami)

(लय- भक्तामर)

① सुरतरू समान् शीतल शासन की ध्छाया ।
 दृढ़ ध्यान योगी तारक पावस है पाया ।।
 इकमास मौन धारी एकान्त वासी । 
शासन के गौरव का गौरव आज गाया।
② श्रमशील संत् सुमतिका मार्गदर्शन
 देवारय श्रमण देते मार्मिक संभाषण
 आदित्यमुनि ने जनमानस को लुभाया 
श्रावक समाज सीखा पल-2 प्रबन्धन 
③ थी ज्ञान संवर्धनी प्रतियोगिताएं 
भिक्षु विचारदर्शन सबको लुभाए
. तुलसी  विचारदर्शन श्रुत को बढ़ाए
④ इतिहास है बनाया तप त्याग का निराला
 जपध्यान मौन पौषध या नित्य‌माला
 बनकर उपासक करे. हम संघ सेवा
 गुण संपदा बढ़ाऐ छाए उजाला
④ बीता है आज पावस देते विदाई 
शासन को शान तमने शिखरों चढाई
 कृतज्ञ आज है परिकर ज्ञानशाल
 हो पुनः पावस यहां यह आस लाई

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top