( तर्ज -धरती धोरां री)
म्हारा मुनि वरजी(3)
दिल में आज उदासी छाई (2)
देवा मुनिवर आज विदाई (२)
मानवता रा आप पुजारी,
त्यागी हो भारी उपकारी
नत मस्तक सब नर नारी
आप पधारे खुशियांआई
तनमन नयी चेतना आई
चावा नहीं महे कोई जुदाई
अमृत वाणी आप सुणाई
जिन मारग री रीत बताई
अंतर अनुपम मोह जगाई
म्हाने भूल नहीं थे जाज्यों
कृपा करको पाछा आइज्यों
सबको पथ दर्शन करवा ज्यों
म्हारी मुनिवर जी हो म्हारा सतिबर जी