(लय-माईन माईन)
छोड़ हमें जाये सतिवर जी कैसा कैसा लगता
नाम विदाई का सुन सुनकर मन भर भर के आता
जाते क्यो बोलो 2
पुण्याई है। प्रबल हमारी भैक्षवशासन पाया
तेरापंथ सा नंदनवन और कल्पतरू सी छाया
गण का सुयश बढाये सबमिल 2 अनुशासन मन भाता ।
पावस मे सब रंग लगाया, भूल नहीं पायेंगे,
दौड़े -2सब मिल आते. अब हम कहां जाएगे
सोचो सतिवर बोलो कुछ तो जाना नहीं सुहाता
कितनी हुई तपस्या सतिवर इस पावस में
चार दशक के बाद हुआ, मासिक तप भी पावस में कितनी मेहनत की सतिवर क्या शब्दों मे गाया जाता
कन्यामण्डल महिलामण्डल बच्चे सब मिल गाते
यात्रा सुखद रहे सतिवर ये मंगलभाव सुनाते
वापस जल्दी यहा पधारो रहे सदा सुखसाता
नादानीवश हमसे कोई भूल हुई ही हो सतिवर
क्षमाशील हो सरल हृदय हो माफ कराना सतिवर
अरजी है इतनी सतिवर जी भूल हमें ना जाना।
(लय-माईन माईन)