देना है तो दीजिये जन्म 2 का साथ
मेरे सिर पर रखदो गुरु वर अपने ही दोनो हाथ
झुलस रहे हैं गमकी धूप में प्यार की छैंया करदे तू
बिन पानी के नाव चलेना । अब पतवार पकडले तू
मेरा रस्ता रोशन करदे छाई अंधियारी रात
इस जनम में सेवा देकर बहुत बड़ा अहसान किया
तुम्ही राम और कृष्ण (बाबा) हमने तुझे पहचान लिया
सुना है हमने शरणा गत को, अपने गले लगाते हो
ऐसा हमने क्या मांगा है जो देने में हिचकाते हो
चाहे जैसे रखलो गुरूवर बस होती रहे मुलाकात