(तर्ज-मायरे की बेला)
दीक्षा की बेला आई, देते हम तुमको विदाई,
गृहस्थ जीवन को जा रही छोड़ के
देखो ढोल नगाड़ा बाजे द्वार है
हो बहना जन्मों तक तेरा उपकार है
(नाम)बाबुल का आंगन छोड़ा, माता का आंचल छोड़ा बहन भाई को छोड़ा, साथी बचपन के छोडे
आजादी तुमने पायी, जिनवर से प्रीत लगाई
जन्मों तक तेरा उपकार है
बहना जन्मों तक तेरा —–
घड़िया अनमोल है आई, आंखे हैं भर-२ आयी
दीक्षा की अनुमति पायी, गुरुवर की कृपा है भारी
चादर को ओढके उजली, उसको मत करना मैली
हर पल सजगता की दरकार है
हो बहना जन्मों तक तेरा उपकार है