।। श्री श्याम वन्दना ।।
(तर्ज-कन्हैया घर आजा रे…)
आये है दिन फागण के, आये है दिन नाचण के,
आज नहीं तो कद नाचोगे, बीत गये दिन सावण के ।।
यहीं वो दिन घर घर कीर्त्तन होता,
बाबा से जाके मिलणे का मन होता ।
आये है दिन खाटू जाकर, गीत श्याम के गावण के ।।
यहीं वो दिन बाबा सबको बुलाये,
खाटू में दिल खोल के माल लुटाये,
बाबा से जो चाहे माँगो, आये है दिन माँगण के ।।
गाड़ी की सब टिकट कटावण लागे,
बाबा से सब हेत लगावण लागे,
आये है दिन शिखर बन्द पर, श्याम निशान चढ़ावण के ।।
यहीं वो दिन खाटू नगरिया सजती,
ऐसे कि जैसे कोई दुल्हनिया लगती,
बाबा बनेंगे दुल्हे राजा, ये दिन बैण्ड बजावण के ।।