Gyanshala Ke Liye

(लय-भकतामर)
सुरतरु समान शीतल शासन ‌की छाया 
सौभाग्य है हमारे यह  हमने पाया 
 आचार्य श्रृंख‌ला  ने सींचा है इसको 
महाश्रमण जी ने इसको आगे बढ़ाया 
शासन के गौरव मुनितारक सुहाते 
सहयोगी सन्त पथ दर्शन है कराते ।
 विश्न विनय मूर्ति है यशोधरा जी
 संयोग साध्वियों का खुशिया मनाते 
संस्कार संवरधंनी है, ज्ञान शाला 
देती है बाल पीढ़ी को ज्ञान प्याला
गुरुदेव तुलसी गणी ने इसको चलाया 
 अजान तिमिर मिटता होता उजाला 
नवकार मन्त्र और वन्दन पाठ पाया
 पच्चीसबोल भक्तामर भी सिखाया
प्रेक्षा की धार  करती मनको व्यवस्थित
  जीवन विज्ञान देता देता मजबूत काया
 (सेतन्‌का तेज पाया)
हम होनहार बालक संस्कार पाते 
नहीं चूकते कभी हर रोज आते 
क्यों भेजते नहीं है अब आपबोले 
टीचर्स लगते प्यारे स्टोरी सुनाते
बीता है सत्र मिलकर उत्सव मनाते
दि ल्ली की ज्ञान शाला सानिध्य पाये
 हम संघ के सिपाही यशगीत गाये
 अविनय हुआ अगर तो माफी भी चाहे 
लेकर क्षमा सभी से सबको खमाएं

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