Jay MahaTapasvi Mahashraman

(लय – स्वामीजी थारी साधना री मेरू सीऊंचाई)
जय महातपस्वी महाश्रमण जय वीतराग अवतारी -2
वीतराग अवतारी-2 जय-2 प्रभुता धारी
 जय महातपस्वी महाश्रमण जय वीतराग अवतारी -2
ओ मेरे भगवान तुम्हारा धाम हृदय ये मेरा -2 
देखो ध्यान लगा कर निशदिन ध्यान धरू में तेरा-2 
तू ही मेरा आधार है, प्राणों का पालन हार है-2 
जिभुवन तारण हारी तेरी-2 शरण सदा सुखकारी
 जय महा तपस्वी महाश्रमण–
आते है दर्शन करने लाखों नर तेरे दर पर-2 
नही रहे कोई बाकी मिलता सबको आर्शीवर-2 
हर समय खुला दरबार है करुणा मानो साकार है-2
 पार लगादो नया सब की-2 ओ जन 2 उपकारी
 जय महातपस्वी महाश्रमण —
आकर्षक आभामण्डल,  मन भावन नयन बदन है-2
 सन्निधि में जो भी आता पाता वह अपना पन है -2
 मुख पर मोहक मुस्कान है ,अनुकंपा ही पहचान है-2 तुलसी महाप्रज्ञ की कृति आकृती तेरी मनहारी
जय महातपस्वी महाश्रमण —
तेरा प्रवच‌न जन जन के मन की जड़ता को हरता -2
झरताअधरो से अमृत ,चेतनको चिन्मय  करता-2 
तेजस्वी तेरी साध‌ना, मृदुता दृढ़ता मय शासना – 2  
सम शम श्रम संगम हरदम, तू ही मंगल कारी
जय महातपस्वी महाश्रमण —

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