Kunku Bhariyo Batko

(लय-उमराव थारी बोली मीठी लागे)
गणेश जी का गीत
कुंकु भरियो बाटको मोतया भरियो थाल
  बनड़े रा दादोसा गजानन्द ने ध्याओ म्हारा राज गजानन्द न ध्याय ल्यो रिद्धि सिद्धि लेवो रे मनाय
 बनडे रा दादीसा हँस-2 मंगल गावो महारा राज
इसी तरह सब रिश्ते दारो के नाम लेने है

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