Maitri Diwas Manaye Hum (paryushan)

मैत्री दिवस मनायें हम

(लय-धीरे धीरे बोल…)
मैत्री दिवस मनायें हम, मन को विमल बनायें हम ।
सरल हृदय बन जायें हम, सबसे आज खमायें हम ।
हम ग्रंथियों को खोल लें, रूठों से हंसकर बोल लें ।। ।।
भूलों का पुतला होता इन्सान ।
हंसता रोता करता है तूफान ।
नादान भी, गुणवान भी,
बहुरंगे रूपों में रचा, अब एकरूपता लायें हम ।।१।।
नाग अहं का जब करता फुफकार ।
नाजुक रिश्तों में भर देता खार ।
नहीं झुकता अहम्, होता गहरा जख्म, 
पुल खमत खामणा का बना, पय मिश्री ज्यों मिल जायें हम।।२।।
महावीर के उपदेशों का सार ।
सरल बनों मत करो कपट व्यवहार ।
मोक्ष चाहो अगर, ले लो सीधी डगर ।
यह दिवस प्रेरणा दे रहा, मैत्री के दीप जलायें हम ।।३।।
धरती से आकाश तक, गूंज उठे आवाज ।
हम सदियों से एक थे, एक रहेंगे आज ।।

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