Mithila Ka Kan Kan Khila

मिथिला का कण कण खिला (राम विवाह)

मिथिला का कण-कण खिला, जमाई राजा
राम मिला 
जनक सुता संग तुम रहियो ऐसे।
 कनक कली पर भंवरा जैसे हे रामचंद्र चकोरी सिया, जमाई राजा राम मिला। मिथिला का कण-कणखिला….. 
कनक अटारी जनक दुलारी।
 निरख रही है तोहे धनुषधारी ,लेके पलकों में तुमको छुपा, 
जमाई राजा राम मिला। मिथिला का कण-कण खिला….
पति-पत्नी व्रत्त धर्म निभाना। दोनों कुलों का मान बढ़ाना। अब दुनिया का होगा भला, जमाईराजा राम मिला
मिथिला का कण-कण खिला….

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