(लय- तुम्हे सूरज कहूं या चंदा)
मुझे इस दुनिया में लाया, मुझे बोलना चलना सिखाया
ओ मात पिता तुम्हें वंदन मैंने किस्मत से तुम्हें पाया
मैं जब से जग में आया तबसे दी शीतल छाया
कभी गोदी में सहलाया कभी कांधे पर बिठाया
मेरे सर पर हाथ रखकर बस प्यार ही प्यार लुटाया
मै उठा के सर चलता हू इस लायक तुमने किया है
मै हाथ नहीफैलाऊ मुझे तुमने इतना दिया है।
मुझे जग कीरीत सिखाई, मुझे धर्म का पाठ पढ़ाया
माँ बाप की आंखों से मै आंसू बन के ना गिरूगां
मां बाप का दिल जो दुखादे मै ऐसा कुछ ना करुंगा
माँ बाप के रूप में मैंने भगवान को जैसे पाया
जब देव भी मात पिता का उपकार चुकाना पाए
तब कैसे हम उनके गुण को दो शब्द में गा पाए
मै फर्ज निभा पाऊ तो समझूंगी अंश चुकाया