(लय- निर्बल से लड़ाई बलवान की), (दिया और तूफान (
सारे जग में ज्योति ज्ञानकी
ये कहानी है महावीर भगवान की
चेत सुदी तेरस आई क्षत्रिय कुण्ड में खुशी छाई
वहाँ जन्म हुआ रे प्रभु वीर का
सिदार्थ के दुलारे माता त्रिशला के प्यारे
वर्धमान धरा रे नाम वीरका
देव देव्या सज आये मेरू शिखर पे लाये
करी नहान पूजा रे वर्धमान की —-
फिर ऐसी घड़ी आई,मन से ममता भुलाई
तब तोड़ दिया रे माया जालको
सोतये जग को जगाने हिंसा पाप मिटाने
वो तो छोड़ चले रे घर बार को
वन वन थे फिरे दया भाव धरे
उन्हें ज्योति जगानी धर्म ध्यान की
बारह वर्ष घूम घूम घोर तप किया खूब
सारे कर्म खपाये प्रभु वीरने
था बैशाख का महीना दिन सुदी दशमी का
केवल ज्ञान पाया रे महावीर ने
देव दुन्दुभी बजी सबके मेन में खुशी
तीन लोक की प्रभु ने पहचान की
0